अंटार्कटिका महाद्वीप एक नजर

अंटार्कटिका महाद्वीप एक नजर

(Antarctica Continent GK / Antarctica Mahadeep Ek Nazar)

अंटार्कटिका महाद्वीप (Antarctica Continent) –

अंटार्कटिका (या अन्टार्टिका) पृथ्वी का दक्षिणतम महाद्वीप है, जिसमें दक्षिणी ध्रुव अंतर्निहित है।

यह, एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका के बाद, पृथ्वी का पांचवां सबसे बड़ा महाद्वीप है, अंटार्कटिका का 98% भाग औसतन 1.6 किलोमीटर या इससे भी मोटी बर्फ से आच्छादित है।

‘पॉल्मर प्रायद्वीप’ गर्मी में बर्फ से कुछ हद तक मुक्त होता है। यह प्रायद्वीप दक्षिणी अमेरिका के हॉर्न अंतरीप (Cape Horn) की ओर बढ़ा हुआ है।

इस महाद्वीप की खोज का सर्वप्रथम प्रयास जेम्स कुक ने किया था, कई लोग इस महाद्वीप की खोज का श्रेय जेम्स कुक को ही देते है। परन्तु अंटार्कटिक वृत्त पार करने के बावजूद भी वे इसकी मुख्य भूमि तक नहीं पहुँच पाए थे।

इस महाद्वीप की मुख्य भूमि की खोज करने वाला व्यक्ति वेलिंग शॉसेन (रूसी शाही नौसेना का एक कप्तान) को माना जाता है, जो 1820 ई. में वोस्टॉक नामक जहाज पर सवार होकर यहां पहुँचा था।

क्षेत्रफल – लगभग 1,40,00,000 वर्ग किमी.

जनसंख्या – 5000 (अस्थाई रूप से रहने वाले शोधकर्त्ता, वैज्ञानिक एवं उनके सहयोगी)

 

अंटार्कटिका महाद्वीप के बारे में मुख्‍य तथ्‍य (Important GK Facts of Antarctica continent) –

  • इस महाद्वीप का तापमान 4°C से कम रहता है।
  • औसत रूप से अंटार्कटिका, विश्व का सबसे ठंडा, शुष्क और तेज हवाओं वाला महाद्वीप है और सभी महाद्वीपों की तुलना में इसका औसत उन्नयन सर्वाधिक है। अंटार्कटिका को एक रेगिस्तान माना जाता है।
  • यहाँ का कोई स्थायी निवासी नहीं है लेकिन साल भर लगभग 1,000 से 5,000 लोग विभिन्न अनुसंधान केन्द्रों जो कि पूरे महाद्वीप पर फैले हैं, पर उपस्थित रहते हैं।
  • दक्षिणी ध्रुव तक पहुँचने वाला प्रथम व्यक्ति नॉर्वे निवासी एमंडसन था, जो 1911 ई. में अंटार्कटिका महाद्वीप पर पहुँचा था। अंटार्कटिका पहुँचने वाली पहली महिला कैरोलीन मिकेलसन (Caroline Mikkelsen) थी।
  • अंटार्कटिका पहुँचने वाला प्रथम भारतीय रामचरणजी (1960 ई.) थे, जबकि दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाले प्रथम भारतीय कर्नल जतिन्दर कुमार बजाज (Colonel Jatinder Kumar Bajaj) थे। डॉ. गिरिराज सिरोही का नाम भी दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाले प्रथम भारतीय के रूप में माना जाता है।
  • भारत ने इस महाद्वीप पर भू-संरचना, मौसम, पर्यावरण, जीवाश्म, जीव-जन्तु, वनस्पति, खनिज आदि के वैज्ञानिक परीक्षण हेतु विभिन्ना समय अनुसंधान केन्द्र एवं प्रयोग शालाऐं खोली, जो निम्न है —
  1. सन् 1983-84 में दक्षिणी गंगोत्री (Dakshin Gangotri) की स्थापना की गई।
  2. सन् 1987-89 में मैत्री शोध केन्द्री की स्थापना की गई। आठवें दल द्वारा।
  3. सन् 2006 ई. में नवीन शोध केन्द्र भारती नाम से प्रिड्ज बे के निकट ‘लार्समन हिल्स’ में बनाया गया। इस केन्द्र ने 2012 से परीक्षण शुरु किया।
  • गोवा के वास्कोडिगामा में केन्द्रीय अंटार्कटिक और समुद्र अनुसंधान (NCAOR) संस्थान ने आइसोट्रेस लेबोरेटरी का उद्घाटन किया गया।
  • 23 जुलाई, 2014 को भारत का पहला बहुसेंसर ऊसर वेधशाला इंडआर्क (Ind ARC) ‘कौंग्स्फजौर्डेन’ में स्थापित किया गया।
  • शीत ऋतु और ग्रीष्म ऋतु में महाद्वीप का अलग – अलग आकार होने के कारण ही इसे ‘गतिशील महाद्वीप’ कहते है।
  • समुद्री तटों से बर्फ के बड़े – बड़े टुकड़े टूटकर समुद्र में तैरते रहते हैं, जिन्हें ‘हिमशैल’ कहते हैं। ये हिमशैल मीठे पानी के भंडार हैं।
  • अंटार्कटिका में बर्फ की 19 मीटर मोटी परत के नीचे ‘विदा’ नामक अत्यधिक खारे पानी की झील मिली है।
  • क्वीन मॉड’ पर्वत श्रेणी  (Queen Maud Mountains) इस महाद्वीप को दो बराबर भागों में बांटती है। यहां की सर्वोच्च चोटी ‘विंसन मैसिफ‘ (Vinson Massif) है।
  • ‘माउंट एर्बुश’ (Mount Erebus : Volcano in the Antarctic) इस महाद्वीप का अकेला सक्रिय ज्वालामुखी है।
  • इस महाद्वीप की भूमि तीन महासागरों से घिरी है- हिन्द महासागर, प्रशांत महासार और अटलांटिक महासागर। इन महासागरों के दक्षिणी छोर को दक्षिणी महासागर या अंटार्कटिक महासागर कहते हैं।
  • वेडेल सागर व रॉस सागर (Weddell Sea & Ross Sea) अंटार्कटिक महासागर के ही भाग है।
  • सूर्य के उत्तरायण के बाद यहां छ: महीने तक रात होती है जबकि सूर्य के दक्षिणायन के बाद यहां छ: महीने तक दिन रहता है। परन्तु- सूर्य की किरणे इतनी तिरछी होती है कि वायु गर्म नहीं हो पाती है। नवम्बर से फरवरी का समय इस महाद्वीप का मुख्य ग्रीष्मकाल है।
  • ओजोन रिक्तीकरण/ओजोन ह्रास एवं ओजोन छिद्र (Ozone Hole) की प्रक्रिया की खोज सबसे पहले अंटार्कटिका महाद्वीप में 1985 ई. में हुई। इसी छिद्र से होकर सूर्य की खतरनाक किरणें सीधे धरती पर पहुँचती हैं।
  • लाइकेन और मॉस यहां की मुख्य वनस्पति है।
  • अल्बाटरोस व पेटरल नामक उड़ने वाले समुद्री पक्षी तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
  • पेंग्विन इस महाद्वीप की अपनी पहचान है। यह बिना उड़ने वाली चि‍‍ड़िया के रूप में जानी जाती है।
  • इस महाद्वीप में विश्व के वैज्ञानिक अनुसंधान कार्य में लगे हुए हैं। यहां अनेक प्रकार के खनिज, जैसे- सोना, चांदी, तांबा, कोयला, मैंगनीज, यूरेनियम, प्लैटिनम, क्रोमियम खनिज एवं प्राकृतिक गैस आदि की जानकारी मिल चुकी है। लेकिन प्राकृतिक कठिनाइयों के कारण खनन नहीं हो सका है।
  • यह महाद्वीप वैज्ञानिकों को पृथ्वी के बारे में अधिक जानकारी देने के अनोखे अवसर अवश्य प्रदान करता है, इसलिए इसे विज्ञान के लिए समर्पित महाद्वीप (The Continent Dedicated to Science) भी कहते है।
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