ब्रह्माण्ड

ब्रह्माण्ड (Cosmos)

ब्रह्माण्ड में सभी ग्रह, तारे (सूर्य आदि), गैलेक्सिआँ (आकाश गंगा जैसी), गैलेक्सियों के बीच के अंतरिक्ष की अंतर्वस्तु, अपरमाणविक कण और सारा पदार्थ तथा सारी ऊर्जा शामिल है। अवलोकन योग्य ब्रह्माण्ड का व्यास वर्तमान में लगभग 28 अरब पारसैक (91 अरब प्रकाश-वर्ष) है। पूरे ब्रह्माण्ड का व्यास अज्ञात है, और ये अनंत हो सकता है।

मिस्र-यूनानी परम्परा के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री क्लाडियस टॉलमी (Claudius Ptolemy) (सन् 140 ई.) ने सर्वप्रथम ‘जियोसेन्ट्रिक अवधारणा’ (Geocentric Concept) का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार, पृथ्वी ब्रह्मांड के केन्द्र में है तथा सूर्य व अन्य ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं।

ब्रह्माण्ड के विषय में यह अवधारणा काफी लम्बे समय तक रही।

सन् 1543 ई. में कॉपरनिकस (Copernicus) ने ‘हेलियोसेनिट्रक अवधारणा’ (Heliocentesis concept) का प्रतिपादन किया। इसमें बताया कि ब्रह्मांड के केन्द्र में पृथ्वी नहीं, अपितु सर्य है। यह अवधारणा सौरमण्डल (Solar system/Sour Family) तक सीमित थी।

सन् 1805 ई. में ब्रिटेन के खगोलशास्त्री फ़्रेडरिक विलियम हरशॅल (Friedrich Wilhelm Herschel) ने दूरबीन की सहायता से अंतरिक्ष का अध्ययन कर बताया कि सौरमंडल, आकाशगंगा (Milky Way Galaxy) का एक अंशमात्र है।

सन् 1925 ई. में अमेरिका के खगोलशास्त्री एडविन पी. हब्वेल (Edwin Powell Hubble) ने स्पष्ट‍ किया कि दृश्य पथ में आने वाले ब्रह्माण्ड का व्यास 250 करोड़ प्रकाश वर्ष है और इसमें आकाशगंगा की तरह लाखों आकाशगंगाएँ है।

ब्रह्माण्ड की अवधारणा में समय-समय पर क्रमिक परिवर्तन हुए तथा ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति की व्‍याख्‍या में कई सिद्धान्त भी दिए गए हैं →

बिग बैंग सिद्धांत (Big-Bang Theory) – जॉर्ज लैमेन्टर (George Lamenter 1960-70)

साम्यावस्था सिद्धांत (Steady State Theory) – थॉमस गोल्ड् एवं हर्मन बांडी (Thomas Gold & Herman Bandy)

दोलन सिद्धांत (Pulsating Universe Theory) – डॉ. एलन संडेज (Dr. Allen Sandez)

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