राजस्थान के प्रमुख विष्णु मन्दिर

राजस्थाiन के प्रमुख विष्णु मन्दिर

दत्तात्रेय का मन्दिर-

  • माउण्ट आबू (सिरोही)- यह मन्दिर राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी गुरू शिखर पर स्थित हैं।
  • गुरू शिखर चोटी की ऊंचाई समुद्रतल से 1722 मीटर हैं और इस मंदिर की ऊंचाई 5 मीटर है।
  • इस मंदिर की ऊंचाई को जोड़ने पर गुरूशिखर की ऊंचाई 1727 मीटर होती है।

हरिहर मन्दिर- औसिंया (जोधपुर)

वराह मन्दिर-पुष्कर (अजमेर)-

  • इस मन्दिर का निर्माण अर्णोराज ने करवाया लेकिन औरंगजेब के तोड़ने के बाद इस मन्दिर को वर्तमान स्वरूप जयपुर के सवाई जयसिंह ने दिया था।

रंगनाथ मंदिर-पुष्कर (अजमेर)-

  • यह मन्दिर वैष्णव धर्म की रामानुज शाखा से सम्बन्धित हैं। इस मंदिर में भगवान विष्णु व लक्ष्मी सिंह पर सवार हैं तथा इस मन्दिर में नृसिंह जी की प्रतिमा भी हैं।

श्री कल्याण जी का मंदिर डिग्गी, मालपुरा (टोंक)-

  • इसे ’कल्हपीर’ तथा ’कुष्ठ रोग के निवारक’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस मन्दिर का निर्माण संग्राम सिंह के काल में हुआ।

लक्ष्मी नारायण जी/बिड़ला मंदिर (जयपुर)-

  • यह राजस्थान का एकमात्र मन्दिर है जो हिन्दू, मुस्लिम व ईसाई डिजाइन से बना हुआ हैं।
  • यह मन्दिर मकराना के सफेद संगमरमर से बना है तथा एशिया का प्रथम वातानुकुलित मंदिर भी यही है।

गुसाई मन्दिर- जुंजाला (नागौर)

जावर का विष्णु मन्दिर- जावर (उदयपुर)-

  • इस मंदिर का निर्माण मेवाड़ के शासक कुंम्भा की पुत्री रमाबाई/बागीश्वमरी ने ईश्वर नामक सूत्रधार की सहायता से पंचायत शैली में बनवाया था।
  • रमा बाई की शादी जूनागढ़ (गुजरात) के मण्डलीक यादव से हुई थी। इस मंदिर में रमा कुण्ड हैं।

रमा बैकुण्ठ जी का मंदिर (पुष्कर-अजमेर)

तेली/लक्ष्मीनारायण जी का मंदिरः- श्रीनाल, मांगरोल (बारां)

कल्की मंदिर- (जयपुर)-

  • इसका निर्माण जिस देवता का अभी अवतार नहीं हुआ उसकी याद में ईश्वरी सिंह ने करवाया।
  • यह भारत का एकमात्र कल्की विष्णु मंदिर हैं। इस मंदिर में एक संगमरमर का घोड़ा हैं, जिसके खुर के नीचे एक गड्ढ़ा हैं।

वेंकेटश्वर/तिरूपति बालाजी का मंदिर- सुजानगढ़ (चुरू)-

  • द्रविड़ शैली में बना हुआ यह उत्तरी भारत का एकमात्र तिरूपति मन्दिर हैं। इस मंदिर का निर्माण वेंकटेश्वर फाऊण्डेश्नआ ट्रस्ट के सोहनलाल जानोदिया द्वारा 1994 में डॉ. एम. नागराज तथा वेंकटाचार्य वास्तुविद् की देखरेख करवाया गया था।
  • इस मन्दिर का उद्घाटन 21 फरवरी 1994 को राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री भैरों सिंह शेखावत ने किया।
  • इस मंदिर में भिति चित्रों के माध्यम से भगवान विष्णु के दस अवतारों को दिखाया गया है- 1. मत्स्य 2. कर्म 3. वराह 4. नृसिंह 5. वामन 6. परशुराम 7. श्रीराम 8. बलराम 9. श्रीकृष्ण 10. कल्की।
  • इस मंदिर में तिरूपति तिरूमल्ला देवस्थानम् आन्ध्रप्रदेश द्वारा प्रदत्त पाषाण एवं पंचलौह धातु की मूर्तियां प्रतिष्ठापित की गई है।
  • यह मन्दिर उत्तर भारत व दक्षिण भारत के मिलन की नयनाभिराम झांकी प्रस्तुत करता है।

विशेष- राजस्थान में दूसरा तिरूपति बालाजी का मंदिर कोटा में है।

आभानेरी- दौसाः-

  • हर्षद माता का मन्दिर मूलतः विष्णु मन्दिर हैं।
  • इस मन्दिर में ’’चतुव्र्यूह विष्णु भगवान व कृष्ण रूकमणि के पुत्र प्रद्युम्न’’ के मूर्तियां है।

रणछोड़ जी का मंदिर –खेड़ (बाड़मेर)-

  • इसे खेड़ीया बाबा व भूरिया बाबा भी कहते हैं जो रेबारियों के आराध्य देव हैं। यह मन्दिर मजबूत परकोटे से घिरा हुआ हैं तथा इसमें विष्णु की शेष श्यान मूर्ति हैं।

सास-बहु का मंदिर- नागदा (उदयपुर)-

  • सोलंकी व महामारू शैली में बने इस मन्दिर को ’’सहस्त्र बाहु’’ तथा ’’अदभूत मंदिर’’ भी कहा जाता हैं।
  • ये विष्णु को समर्पित दो मंदिर है जिसमें सास का मन्दिर बड़ा तथा बहु का मंदिर छोटा हैं।

जगदीश जी का मंदिर-उदयपुरः-

  • इस मंदिर का निर्माण महाराणा जगत सिंह प्रथम ने अर्जुन की निगरानी में सूत्रधार भाणा व उसके पुत्र मुकुन्द की सहायता से 1651 ई. में पिछोला झील के किनारे सिटी पैलेस के पास करवाया।
  • इस मंदिर को सपने में बना मंदिर भी कहते है तथा जगदीश जी की 5 फीट की काले पत्थर की प्रतिमा शर्वा (डूंगरपुर) से पीपल वृक्ष के नीचे लाई गई थी। इस मंदिर के गर्भगृह में गरूड़ की प्रतिमा है इस गरूड़ की प्रतिमा को एशिया की सर्वश्रेष्ठ गरुड़ प्रतिमा माना जाता है।
  • इस मन्दिर को औरंगजेब से बचाने के लिए नारू जी बारहठ ने प्राण त्यागे थे। इस मंदिर में जगन्नाथ राय प्रशस्ति है जो कृष्ण भट्ट ने लिखी थी, इस मंदिर के पास वाला धाय का मंदिर महाराणा जगतसिंह की धाय नौजूबाई द्वारा बनवाया गया था।
  • इस मंदिर के चारों कोनों में पार्वती, गणेश, सूर्य व देवी के मंदिर हैं।
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