लिंग

लिंग

(Hindi : Gender)

परिभाषा : ‘लिंग’ का शाब्दिक अर्थ प्रतीक या चिह्न होता है। संज्ञाओं को जिस रूप से उसकी पुरुष जाति या स्‍त्री जाति का बोध होता है, उसे ही लिंग कहा जाता है।

जैसे – (i) लड़का खेल रहा है।

(ii) लड़की लिख रही है।

(iii) बच्‍चे पढ़ रहे हैं।

(iv) बालिकाएँ लिख रही हैं।

उपर्युक्‍त वाक्‍यों में हम देखते हैं कि किसी संज्ञा का प्रयोग पुल्लिंग में तो किसी का स्‍त्रीलिंग में हुआ है। इस प्रकार लिंग के दो भेद होते हैं –

(i) पुल्लिंग : जिससे पुरुष जाति का बोध हो।

(ii) स्‍त्रीलिंग : जिससे स्‍त्री जाति का बोध हो।

लिंग की पहचान तथा परिवर्तन के सामान्‍य नियम :

नियम-1. जिन शब्‍दों के अन्‍त में आ, पा, या पन रहता है, वे प्राय: पुल्लिंग होते हैं –

जैसे – खाना, दाना, बुढ़ापा, मोटापन, बचपन आदि।

अपवाद (अर्थात् स्‍त्रीलिंग) : जटा, जरा, माला आदि।

नियम-2. जिन शब्‍दों के अन्‍त में ख, आई, ता, ई, इ या, वट या हट होता है, वे प्राय: स्‍त्रीलिंग होते हैं –

जैसे – गाली, जाली, सवारी, सब्‍जी, साड़ी, इमली, गरमी, नारी, मुस्‍कराहट, झुँझलाहट, सजावट, बनावट, रुकावट, राख, भीख, सीख, भलाई, बुराई, गहराई, ऊँचाई, स्‍वतन्‍त्रता, पराधीनता, कटुता, मधुरता, सुन्‍दरता, सत्ता, प्रसन्‍नता, अक्षुण्‍णता, लड़की, लकड़ी, नदी, कुटिया, मिलावट, थकावट, घबराहट आदि।

अपवाद : मोती, पानी, दही, घी, जी आदि।

नियम-3. भाषाओं और बोलियों के नाम स्‍त्रीलिंग होते हैं –

जैसे – पंजाबी, फारसी, गुजराती, तमिल, अरबी, हिन्‍दी, मैथि‍ली, मराठी, उर्दू, ब्रज, भोजपुरी, बंगला, सिंधी, ग्रीक, अवधी, अंग्रेजी, मलयालम, लैटिन, मगही, संस्‍कृत, कन्‍नड़, फ्रेंच बुंदेली आदि।

नियम-4. अरबी-फारसी (उर्दू) के ‘त’ अन्‍तवाली संज्ञाएँ प्राय: स्‍त्रीलिंग होती हैं –

जैसे – नजाकत, शरारत, जुर्रत, इज्‍जत, शोहरत, इबादत, हिफाजत, कयामत, किल्‍लत, हुज्‍जत, बगावत आदि।

नियम-5. रत्‍नों के नाम, धातुओं के नाम तथा द्रवों के नाम अधिकांशत: पुल्लिंग होते हैं-

जैसे – हीरा, सोना, पन्‍ना, ताँबा, लाल, कांस्‍य, मूँगा, मोती, पुखराज, पीतल, नीलम, लोहा, जवाहर, सीसा, टीन, जस्‍ता, पारा, सोडा, दूध, घी, तेल, जल, कोका, जलजीरा, जूस, काढ़ा आदि।

नियम-6. सब्जियों और पेड़ों के नाम कुछ स्‍त्रीलिंग-

जैसे – पुल्लिंग- देवदार, तेंदु, नारियल, पपीता, खरबूजा, करेला, मटर, टमाटर, सेब, फालसा, तरबूज, कद्दू, खीरा, आलू, पुदीना, अदरक, ताड़, माल्‍टा, जामुन, धनिया

स्‍त्रीलिंग- मौंसबी, इमली, ककड़ी, सरसों, गाजर, भिंडी, फूलगोभी, मूली, मेथी, फराजबीन, शकरकन्‍दी, लीची, चमेली, नरगिस, पालक, तुरई बन्‍दगोभी, नाशपाती

नियम-7. तिथियों के नाम स्‍त्रीलिंग होते हैं –

जैसे – प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्‍ठी, सप्‍तमी, …… पूर्णिमा, अमावस्‍या आदि।

नियम-8. अनाजों के नाम पुल्लिंग होते हैं –

जैसे – गेहूँ, जौ, चना, बाजरा, चावल आदि।

अपवाद – ज्‍वार।

नियम-9. पर्वतों, हिन्‍दी महिनों, दिनों, देशों, जल स्‍थल के नाम पुल्लिंग होते हैं –

जैसे – हिमालय, धौलगिरि, मंदार, चैत्र, वैसाख, ज्‍येष्‍ठ, सोमवार, मंगलवार, भारत, श्रीलंका, अमेरिका, सागर, महासागर आदि।

नियम-10. नदियों एवं झीलों के नाम प्राय: स्‍त्रीलिंग होते हैं –

जैसे – गंगा, यमुना, घाघरा, गण्‍डक, रावी, ताप्‍ती, नर्मदा, सतलज, व्‍यास, चिनाव, झेलम, कृष्‍णा, कावेरी, साँभर झील, पुष्‍कर झील, डल झील आदि।

नियम-11. ग्रह नक्षत्रों के नाम अधिकांशत: पुल्लिंग होते हैं –

जैसे – सूर्य, चन्‍द्र, शनि, बुध, बृहस्‍पति, शुक्र, मंगल, राहु, केतु आदि।

अपवाद – रोहिणी, भरिणी, मृगशिरा, पृथ्‍वी।

नियम-12. कुछ प्राणीवाचक शब्‍दों का प्रयोग केवल स्‍त्रीलिंग में होता है –

जैसे – सुहागिन, सौत, धाय, संतति, संतान, सेना, सती, सौतन, नर्स, औलाद, पुलिस, फौज, सरकार।

नियम-13. शरीर के कुछ अंग पुल्लिंग होते हैं तो कुछ स्‍त्रीलिंग –

जैसे – पुल्लिंग- सिर, माथा, बाल, कान, मुँह, मस्‍तक, ललाट, कंठ, ओष्‍ठ, दाँत, गला, हाथ, पैर, नाखून, भाल, पेट, टखना, अँगूठा, घुटना, मांस, फेफड़ा।

स्‍त्रीलिंग- आँख, नाक, जीभ, वेणी, चोटी, शिखा, दाढ़ी, मूँछ, आँत, गर्दन, ग्रीवा, ठोड़ी, कमर, कलाई, पीठ, कुहनी, उँगली, काँख, हड्डी, शिरा।

नियम-14. जिन शब्‍दों के अन्‍त में त्र, न, ण, ज, आर, आय हो वे प्राय: पुल्लिंग होते हैं-

जैसे – चित्र, रदन, वदन, जागरण, पोषण, मित्र, व्‍याकरण, भोजन, मनोज, पत्र, रमन, पालन, भरण, हरण, भोज, अनाज, ताज, समाज, प्रकार, आचार, विचार, प्रचार, व्‍यावसाय, अध्‍याय, न्‍याय आदि।

अपवाद- थकन, लाज, खोज, हार, हाय, लगन, हुंकार, बोछार, मौज, पुकार।

नियम-15. प्राणियों के समूह को व्‍यक्‍त करने वाली कुछ संज्ञाएँ पुल्लिंग है तो कुछ स्‍त्रीलिंग। जैसे –

पुल्लिंग – देश, परिवार, प्रशासन, समुदाय, संघ, राज्‍य, प्राधिकरण, विद्यालय, मंडल आदि।

स्‍त्रीलिंग – सभा, जनता, सरकार, समिति, कमेटी, टोली, विधानसभा, पाठशाला, भीड़, नगरपालिका, बिग्रेड, संसद आदि।

पुल्लिंग से स्‍त्रीलिंग बनाने के नियम

1. कुछ अकारान्‍त पुल्लिंग शब्‍दों को आकारान्‍त कर देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

छात्र—छात्रा

वृद्ध—वृद्धा

शिष्‍य—शिष्‍या

तनुज—तनुजा

2. कुछ अकारान्‍त एवं आकारान्‍त पुल्लिंग शब्‍दों को ईकारान्‍त कर देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

छात्र—छात्रा

वृद्ध—वृद्धा

शिष्‍य—शिष्‍या

तनुज—तनुजा

3. कुछ अकारान्‍त पुल्लिंग शब्‍दों में ‘नी’ जोड़ देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

मोर—मोरनी

शेर—शेरनी

भील—भीलनी

राजपूत—राजपूतनी

4. कुछ ‘जातिबोधक’ पुल्लिंग शब्‍दों के अन्तिम स्‍वर को लोप करके ‘इन’ लगा देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

कुम्‍हार—कुम्‍हारिन

पुजारी—पुजारिन

सुनार—सुनारिन

ग्‍वाला—ग्‍वालिन

5. कुछ अकारान्‍त पुल्लिंग शब्‍दों में ‘आनी’ जोड़ देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

नौकर—नौकरानी

पण्डित—पण्डितानी

सेठ—सेठानी

ठाकुर—ठकुरानी

6. कुछ ‘जातिबोधक’ पुल्लिंग शब्‍दों के अन्तिम स्‍वर को लोप करके ‘आइन’ लगा देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

ठाकुर—ठकुराइन

पण्डित—पण्डिताइन

चौधरी—चौधराइन

लाला—लालाइन

7. कुछ आकारान्‍त पुल्लिंग शब्‍दों में अन्तिम स्‍वर ‘आ’ के स्‍थान पर ‘इया’ कर देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

नौकर—नौकरानी

पण्डित—पण्डितानी

सेठ—सेठानी

ठाकुर—ठकुरानी

8. अकारान्‍त पुल्लिंग शब्‍दों में ‘अक’ के स्‍थान पर ‘इका’ कर देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं:

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

नायक—नायिका

पालक—पालिका

रक्षक—रक्षिका

पाठक—पाठिका

9. ‘वान्’ से समाप्‍त होने वाले पुल्लिंग शब्‍दों में ‘वती’ तथा ‘मान्’ से समाप्‍त होने वाले पुल्लिंग शब्‍दों में ‘मती’ लगा देने से वे स्‍त्रीलिंग हो जाते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

श्रीमाऩ्—श्रीमती

गुणवान्—गुणवती

सत्‍यवान्—सत्‍यवती

भाग्‍यवान्—भाग्‍यवती

10. कुछ शब्‍द स्‍वतंत्र रूप से स्‍त्री-पुरुष के जोड़े होते हैं :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

वर—वधू

पति—पत्‍नी

पुत्र—पुत्री

पिता—माता

11. कुछ शब्‍द ‘नित्‍य पुल्लिंग’ होते हैं। इनका प्रयोग हमेशा पुल्लिंग के रूप में होता है। इनके पहले ‘मादा’ विशेषण जोड़कर इन्‍हें स्‍त्रीलिंग बनाया जा सकता है :

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

पक्षी—मादा पक्षी

खरगोश—मादा खरगोश

तोता—मादा तोता

चीता—मादा चीता

12. कुछ शब्‍द ‘नित्‍य स्‍त्रीलिंग’ होते हैं। इनका प्रयोग हमेशा स्‍त्रीलिंग के रूप में होता है। इन शब्‍दों के पहले ‘नर’ विशेषण लगाकर इन्‍हें पुल्लिंग बनाया जाता है।

पुल्लिंग—स्‍त्रीलिंग

मैना—नर मैना

चील—नर चील

मक्‍खी—नर मक्‍खी

गिलहरी—नर गिलहरी

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