काल (Hindi Tense)

हिन्‍दी काल

Hindi Tense (Kaal)

परिभाषा : क्रिया का वह रूपान्‍तर जिससे क्रिया के व्‍यापार और उसकी पूर्ण या अपूर्ण अवस्‍था का बोध होता है, ‘काल’ कहलाता है।

जैसे –

  • अर्जुन पुस्‍तक पढ़ता है।
  • अर्जुन ने पुस्‍तक पढ़ी थी।
  • अर्जुन पुस्‍तक पढ़ेगा।

काल के भेद (Kaal ke Bhed) : – काल के तीन भेद होते हैं –

1. वर्तमान काल (Present Tense / Vartman Kaal)

2. भूतकाल (Past Tense / Bhoot Kaal)

3. भविष्‍यत् काल (Future tense / Bhavishyat Kaal)

1. वर्तमान काल : क्रिया का वह रूप जिससे वर्तमान समय में होने का बोध हो, ‘वर्तमान काल’ कहलाता है।

→ वर्तमान काल के पाँच भेद होते हैं –

(i) सामान्य वर्तमानकाल (Present Indefinite)

(ii) संदिग्ध वर्तमानकाल (Present Doubtful)

(iii) सम्भाव्य वर्तमानकाल

(iv) अपूर्ण या तात्‍कालिक वर्तमानकाल (Present Continuous)

(vi) पूर्ण वर्तमानकाल (Present Perfect)

(i) सामान्‍य वर्तमान :- वर्तमान के इस भेद में क्रिया का साधारण रूप से वर्तमान काल में होने का बोध होता है। (पहचान – क्रिया की धातु के अन्‍त में ता है, ती है, ते हैं, ते हो, ता हूँ जुड़े रहते है।)

जैसे –

  • रमा नृत्‍य करती है।
  • कृष्‍ण पत्र लिखता है।
  • लड़के शोर करते हैं।
  • मैं घर जाता हूँ।
  • तुम मंदिर जाते हो।

(ii) अपूर्ण या तात्‍कालिक वर्तमान :- जिस क्रिया के होने या करने के व्‍यापार की निरन्‍तरता का बोध वर्तमान समय में मालूम हो, उसे ‘अपूर्ण’ या ‘तात्‍कालिक वर्तमान काल’ कहते हैं। (पहचान – क्रिया की धातु के अन्‍त में रहा है, रही है, रहे हैं, रहा हूँ, रहे हो जुड़े रहते हैं।)

जैसे –

  • रमा नृत्‍य कर रही है।
  • कृष्‍ण पत्र लिख रहा है।
  • लड़के शोर कर रहे हैं।
  • मैं घर जा रहा हूँ।
  • तुम मन्दिर जा रहे हो।

(iii) संदिग्‍ध वर्तमान :- जहाँ क्रिया के होने में सन्‍देह हो परन्‍तु उसके वर्तमान काल के विषय में कोई सन्‍देह न हो, ‘संदिग्‍ध वर्तमान काल’ कहलाता है। (पहचान:- क्रिया की धातु के अन्‍त में ता होगा, ते होंगे, ते होंगे जुडे रहते हैं।)

जैसे –

  • मनीष पत्र लिखता होगा।
  • पूजा नृत्‍य करती होगी।
  • लडके शोर करते होंगे।
  • वह कॉलेज जाता होगा।
  • तुम मन्दिर जाते होंगे।

(iv) सम्‍भाव्‍य वर्तमान :- जिस क्रिया से कार्य के होने या करने की सम्‍भावना का बोध हो, उसे ‘सम्‍भाव्‍य वर्तमान काल’ कहते हैं।

जैसे –

  • शायद भैया आये हो।
  • रमा मन्दिर गई हो।
  • संभवतया नौकर आया हो।
  • शायद माताजी ने खाना बनाया हो।

(v) पूर्ण वर्तमानकाल (Present Perfect):- इससे वर्तमानकाल में कार्य की पूर्ण सिद्धि का बोध होता है।

जैसे-

  • वह आया है।
  • सीता ने पुस्तक पढ़ी है।

आज्ञार्थक वर्तमान :- क्रिया के जिस रूप से वर्तमान समय में आज्ञा देने का बोध हो, ‘आज्ञार्थक वर्तमान काल’ कहलाता है।

जैसे –

  • महेश, अब तुम खेलो।
  • हरीश, तुम अपना गृहकार्य करो।
  • राधिका, विद्यालय जाओ।
  • विवेक, मेज को साफ करो।

2. भूतकाल :- क्रिया का वह रूप जिससे बीते हुए समय में कार्य के होने का बोध हो, ‘भूतकाल’ कहलाता है।

भूतकाल के छ: भेद होते हैं –

(i) सामान्य भूतकाल (Simple Past)

(ii) आसन भूतकाल (Recent Past)

(iii) पूर्ण भूतकाल (Complete Past)

(iv) अपूर्ण भूतकाल (Incomplete Past)

(v) संदिग्ध भूतकाल (Doubtful Past)

(vi) हेतुहेतुमद् भूत (Conditional Past)

(i) सामान्‍य भूतकाल :- क्रिया का वह रूप जिससे यह ज्ञात हो कि कार्य बीते हुए समय में हुआ है परन्‍तु यह ज्ञात न हो कि कार्य को सम्‍पन्‍न हुए कितना समय हुआ है, ‘सामान्‍य भूतकाल’ कहलाता है। (पहचान:- धातु के अन्‍त में आ, ई, ए की मात्रा होती है या क्रिया की समाप्ति या, ई, ए से होती है।)

जैसे –

  • राकेश विद्यालय गया।
  • आशा ने कहानी सुनाई।
  • परेश ने जंगल में एक शेर देखा।
  • बच्‍चे पढकर घर चले गए।
  • अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया।

(ii) आसन्‍न भूतकाल :- क्रिया का वह रूप जिससे यह पता चले कि कार्य बीते हुए समय में हुआ है। तथा कार्य को पूर्ण हुए अधिक समय नहीं हुआ है अर्थात कार्य का प्रभाव शेष है, ‘आसन्‍न भूतकाल’ कहलाता है। (पहचान :- धातु के अन्‍त में या है, आ है, ई है, ए हैं जुडे होते हैं)

जैसे –

  • राकेश विद्यालय गया है।
  • आशा ने कहानी सुनाई है।
  • परेश ने जंगल में एक शेर देखा है।
  • बच्‍चे पढकर घर चले गए हैं।
  • अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया है।

(iii) पूर्ण भूतकाल :- क्रिया का वह रूप जिससे यह पता चले कार्य को पूर्ण हुए बहुत समय बीत चुका है, ‘पूर्ण भूतकाल’ कहलाता है। (पहचान :- या था, आ था, ई थी, ए थे से क्रिया का अन्‍त होता है।)

जैसे –

  • राकेश विद्यालय गया था।
  • आशा ने कहानी सुनाई थी।
  • परेश ने जंगल में एक शेर देशा था।
  • बच्‍चे पढकर घर चले गए थे।
  • अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया था।

(iv) अपूर्ण भूतकाल :- क्रिया का वह रूप जिससे यह पता चले कि कार्य भूतकाल में हो रहा था, किन्‍तु उसकी समाप्ति के विषय का बोध न हो, ‘अपूर्ण भूतकाल’ कहलाता है। (पहचान :- धातु के अन्‍त में रहा था, रही थी, रहे थे आदि जुडे रहते हैं।)

जैसे –

  • राकेश विद्यालय जा रहा था।
  • आशा कहानी सुना रही थी।
  • परेश जंगल में एक शेर देख रहा था।
  • बच्‍चे पढकर घर जा रहे थे।
  • अमेरिका हिरोशिमा पर बम गिरा रहा था।

(v) संदिग्ध भूतकाल :- क्रिया का वह रूप जिससे भूतकाल तो प्रकट हो परन्‍तु इस बात का संदेह बना रहे कि कार्य हुआ अथवा नहीं, ‘संदिग्‍ध भूतकाल’ कहलाता है। (पहचान :- क्रिया की समाप्ति या होगा, ई होगी, ए होंगे से होती है।)

जैसे –

  • परेश ने जंगल में एक शेर देखा होगा।
  • राकेश विद्यालय गया होगा।
  • बच्‍चे पढकर घर गए होंगे।
  • आशा ने कहानी सुनाई होगी।
  • अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया होगा।

(vi) हेतुहेतुमद् भूतकाल :- क्रिया का वह रूप जिससे भूतकाल में होने वाली क्रिया का होना किसी दूसरी क्रिया के होने पर निर्भर हो, ‘हेतुहेतुमद् भूतकाल’ कहलाता है। (पहचान :- शर्त रहेगी, ता – तो, ती – तो, ते – तो आदि)

जैसे –

  • यदि रवीना परिश्रम करती तो अवश्‍य सफल हो जाती।
  • यदि तुम समय पर स्‍टेशन पहुँचते तो गाडी मिल जाती।
  • यदि वर्षा होती तो फसल अच्‍छी होती।
  • यदि तुम आ जाते तो मैं घर चला जाता।

3. भविष्‍यत् काल :- क्रिया का वह रूप जिससे आने वाले समय में कार्य के होने का बोध हो, ‘भविष्‍यत् काल’ कहलाता है।

भविष्‍यत् काल के तीन भेद होते हैं –

(i) सामान्य भविष्यत काल

(ii) सम्भाव्य भविष्यत काल

(iii) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल

(i) सामान्‍य भविष्‍यत् :- क्रिया का वह रूप जिससे आने वाले समय में कार्य के सामान्‍य रूप से होने का बोध हो, ‘सामान्‍य भविष्‍यत् काल’ कहलाता है। (पहचान:- धातु के अन्‍त में एगा, एगी, एंगे जुडे होते हैं।)

जैसे –

  • परेश जंगल में एक शेर देखेगा।
  • राकेश विद्यालय जाएगा।
  • बच्‍चे पढकर घर जायेंगे।
  • आशा कहानी सुनाएगी।
  • अमरीका हीरोशिमा पर बम गिराएगा।

(ii) सम्‍भाव्‍य भविष्‍यत् :- क्रिया का वह रूप जिससे आने वाले समय में कार्य के होने की सम्‍भावना का बोध हो, ‘सम्‍भाव्‍य भविष्‍यत् काल’ कहलाता है। (पहचान:- वाक्‍य का आरम्‍भ, शायद, सम्‍भवतया हो सकता है आदि से होगा तथा क्रिया की समाप्ति ए, ऐं से होगी।)

जैसे –

  • शायद परेश जंगल में एक शेर देखे।
  • संभवतया राकेश विद्यालय जाये।
  • हो सकता है आशा कहानी सुनाए।

(iii) हेतुहेतुमद् भविष्‍यत् काल :- क्रिया का वह रूप जिससे भविष्‍य में होने वाली क्रिया किसी अन्‍य क्रिया पर निर्भर हो, ‘हेतुहेतुमद् भविष्‍यत् काल’ कहलाता है। (पहचान :- दोनों क्रियाओं का अन्‍त गा, गे, गी, गें से होगा।)

जैसे –

  • यदि रवीना परिश्रम करेगी तो अवश्‍य सफल हो जाएगी।
  • यदि तुम समय पर स्‍टेशन जाओगे तो गाडी मिल जाएगी।
  • यदि वर्षा होगी तो फसल अच्‍छी होगी।
  • यदि तुम आ जाओगे तो मैं घर जाऊँगा।

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