वाक्‍य क्रमबद्धता

हिन्‍दी : वाक्‍य में क्रमबद्धता

(Sentence Rearrangement)

अनुच्‍छेद में क्रमबद्धता

निर्देश : निम्‍नलिखित प्रश्‍नों में दिए गए अनुच्‍छेदों के पहले और अन्तिम वाक्‍यों को क्रमश: (1) और (6) की संज्ञा दी गई है। इसके मध्‍यवर्ती वाक्‍यों को चार भागों में बाँटकर (य), (र), (ल), (व) की संज्ञा दी गई है। ये चारों वाक्‍य व्‍यवस्थित क्रम में नहीं हैं। इन्‍हें ध्‍यान से पढ़कर दिए गए विकल्‍पों में से उचित क्रम चुनिए, जिससे सही अनुच्‍छेद का निर्माण हो।

1. (1) सामग्री के रूप में ‘हर्डर’ के समक्ष यात्रा-वृत्‍तान्‍त और संस्‍कृत-साहित्‍य के प्रारम्भिक अनुवाद थे।

(य) वह मानता था कि पूर्व ही वह स्‍थल है जहॉं भाषा विकसित हुई।

(र) युवा काल में जमकर उसने यात्रा-वृतान्‍त पढ़े थे।

(ल) पश्चिम के वर्ण-समूह पूर्व के रूपान्‍तरण हैं।

(व) वह भारतीय विचारों से पूर्णतया अभिभूत हो गया था।

(6) पूर्व से हस्‍तांतरित होने के कारण ही ग्रीक व्‍याकरण अपेक्षाकृत अधिक व्‍यवस्थित है।

(A) र व य ल

(B) र य ल व

(C) य ल व र

(D) व र य ल

 

2. (1) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

(य) और नवयुग की चेतना लेकर निबन्‍ध के

(र) एवं विचारात्‍मक कोटियों में रखे गम्‍भीर ज्ञान

(ल) प्राचीन सांस्‍कृतिक परम्‍परा का गम्‍भीर ज्ञान

(व) क्षेत्र में अवतरित हुए तथा इनके निबंध भावात्‍मक

(6) इनके व्‍यक्तित्‍व की छाप लिए हुए है।

(A) व र ल य

(B) य ल र व

(C) र व य ल

(D) ल य व र

 

3. (1) आणविक अस्‍त्रों के विरोध में

(य) उद्घाटन करते हुए राजेन्‍द्र बाबू ने भारत को

(र) अपनी सेनाऍं विघटित कर दे, तो

(ल) यह सुझाव दिया था कि यह देश

(व) दिल्‍ली में जो सार्वभौम समारोह हुआ था, उसका

(6) इससे संसार को एक नया रास्‍ता मिल सकता है।

(A) र व ल य

(B) ल य र व

(C) व य ल र

(D) य ल व र

 

4. (1) जीवन एक संघर्ष है,

(य) असहाय स्थिति में भी संघर्ष में कूदा जा सकता है।

(र) मान लिया कि आपके पास साधनों का अभाव है, लेकिन आप तो हैं।

(ल) भले ही आप कमजोर हैं। लेकिन विपदाओं से भिड़ने का, कुछ-न-कुछ करने का साहस तो आप में है।

(व) इस संघर्ष में अपने आपको असहाय समझना और संघर्ष से मुँह मोड़ लेना उचित नहीं है।

(6) यही बहुत है।

(A) र ल व य

(B) य र व ल

(C) य व ल र

(D) व य र ल

 

5. (1) प्रजातान्त्रिक जीवन-व्‍यवस्‍था व्‍यक्ति स्‍वातन्‍त्र्य पर आधारित है।

(य) इस व्‍यक्तिगत स्‍वतंत्रता की सीमाएं भी हैं। जब वह समाज के अन्‍य सदस्‍यों की स्‍वतंत्रता में हस्‍तक्षेप करती है।

(र) प्रत्‍येक व्‍यक्ति अपनी रुचि के अनुसार कार्य कर सकता है।

(ल) वस्‍तुत: प्रजातन्‍त्र शासन-पद्धति मात्र नहीं है, जीवन-चर्या है।

(व) विचार और कर्म के क्षेत्र में अपना दीपक बन सकता है।

(6) उससे आचरण की सभ्‍यता का जन्‍म होता है।

(A) य व र ल

(B) र व ल य

(C) र व य ल

(D) व र य ल

 

6. (1) नाटक में ऐसे अनेक प्रसंग आते हैं जिसमें यह निर्णय करना कठिन हो जाता है कि नाटककार किस उद्देश्‍य से अपनी रचना को प्रस्‍तुत कर रहा है।

(य) भारत के प्राचीन नाटकों में सर्वाधिक जोर जीवन की व्‍याख्‍या पर ही दिया गया है।

(र) ऐसी स्थिति में नाटक के समस्‍त पात्रों के कथनों का परस्‍पर मिलान करके उनका ठीक-ठीक अभिप्राय समझकर नाटक के उद्देश्‍य का निर्णय किया जा सकता है।

(ल) उन उद्गारों का चयन करके ही हमें किसी नाटक का उद्देश्‍य स्थिर करना चाहिए।

(व) टक के प्रधान पात्रों द्वारा ही नाटककार अपने उद्गार प्रस्‍तुत करता है।

(6) यहाँ नाटकों द्वारा सर्वश्रेष्‍ठ नैतिक आदर्श उपस्थित किए जाते हैं।

(A) य व ल र

(B) र व ल य

(C) र ल व य

(D) य ल र व

 

7. (1) दहेज प्रथा का जन्‍म पुरानी सामाजिक प्रथाओं में ढूँढ़ा जा सकता है।

(य) उसे नई गृहस्‍थी बसानी होती है।

(र) विवाह के बाद लड़की एक नए घर में जाती है।

(ल) अपना नया घोंसला बनाने में उसे अधिक असुविधा न हो इसलिए उसे कुछ उपहार देने का रिवाज था।

(व) उपहार में उसे गृहस्‍थी में काम आने वाली वस्‍तुएं स्‍वेच्‍छा से दी जाती थीं, कोई बाध्‍यता नहीं होती थी।

(6) पर धीरे-धीरे इसमें बुराइयां आती गई।

(A) र य ल व

(B) य र ल व

(C) र ल व य

(D) र व ल य

 

8. (1) बीती हुई बातों को चिन्‍ता का विषय बनाकर याद रखने की आवश्‍यकता नहीं है।

(य) हाँ, हानियॉं बहुत हैं।

(र) इसका कुप्रभाव तन और मन पर पड़ता है और जीवन में अवसाद स्‍थायी डेरा डाल लेता है।

(ल) जीवन में दु:ख और कष्‍ट के क्षण आते ही रहते हैं, लेकिन उन्‍हें जीवन भर का दु:ख बनाकर लादे रहने का कोई लाभ नहीं है।

(व) बीती हुई घटनाओं अथवा प्रसंगों को भूल जाना ही श्रेयस्‍कर है।

(6) जीवन को अवसाद से छुटकारा तभी मिलता है, जब बीती बातों को विस्‍मृत कर दिया जाए।

(A) य व ल र

(B) व य र ल

(C) ल व र य

(D) ल य र व

 

9. (1) संसार में किसी का भी जीवन स्‍थायी नहीं है।

(य) महान् से महान् व्‍यक्ति और शक्तिशाली प्रतिभाओं का भी अन्‍त सुनिश्चित है।

(र) इस संसार में तन का घमण्‍ड व्‍यर्थ है, क्‍योंकि देहावसान होता ही है।

(ल) जीवन दो दिन का मेला है।

(व) एक दिन मेला उजड़ जाता है।

(6) धन के वैभव पर इठलाना किस काम का, क्‍योंकि धन दौलत की शान एक दिन समाप्‍त हो जाती है।

(A) व ल य र

(B) य र व ल

(C) ल व य र

(D) व र ल य

 

10. (1) शौर्य आदि गुणों का सम्‍बन्‍ध मनुष्‍य के शरीर के साथ नहीं रहता।

(य) शरीर से दुबले-पतले आदमी को भी हम अत्‍यन्‍त वीरता वाले काम करते इसलिए देखते हैं कि उसके भीतर शूरता भरी रहती है।

(र) कहा गया है कि शब्‍द और अर्थ तो काव्‍य के शरीर होते हैं तथा रस ही आत्‍मा के स्‍थान पर होता है।

(ल) वह आत्‍मा के ही साथ होता है।

(व) काव्‍य में भी ठीक यही दशा होती है।

(6) गुण आत्‍मा अर्थात् रस के ही धर्म होते हैं।

(A) य व र ल

(B) ल य व र

(C) व य ल र

(D) र य ल व

 

11. (1) विज्ञान का जीवन तीन सौ वर्षों से अधिक नहीं है। कम-से-कम प्रायोगिक विज्ञान के सम्‍बन्‍ध में यह निश्‍चय के साथ कहा जा सकता है।

(य) इसीलिए विज्ञान के चमत्‍कारों की चकाचौंध में हम नहीं पड़ें।

(र) उनसे ऊपर उठकर हम प्रेम, सौहार्द्र और मैत्री के स्‍त्रोत मानवात्‍मा की ओर मुड़ें

(ल) मनुष्‍य की देह नहीं, उसकी आध्‍यात्मिक और नैतिक चेतना को धारण करने वाली उसकी आत्‍मा हमारा लक्ष्‍य हो

(व) परन्‍तु मनुष्‍य जाति का सांस्‍कृतिक जीवन सहस्‍त्रों वर्ष पुराना है और उसे छोड़ना सम्‍भव नहीं है।

(6) सर्वोदय का सन्‍देश यही है।

(A) व य र ल

(B) य र व ल

(C) ल व र य

(D) व ल र य

 

12. (1) अपने देश के कई भागों में इधर-उधर ताम्‍बा काफी मात्रा में बिखरा पड़ा है।

(य) जमीन के ऊपर बने छेद से तेजाबी घोल डाला जाए तो ताम्‍बा उसमें घुल जाएगा।

(र) विस्‍फोट करने से जमीन के अन्‍दर का ताम्र अयस्‍क भण्‍डार टूट-फूट जाएगा।

(ल) पारम्‍परिक तरीकों से इसे निकालने में बहुत खर्च आएगा।

(व) इसके लिए न्‍यूक्लियर विस्‍फोट बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

(6) इस द्रव ताम्‍बे को ऊपर खींचा जा सकता है।

(A) व ल र य

(B) य र व ल

(C) ल व र य

(D) व र य ल

 

13. (1) महात्‍मा गॉंधी के जीवन के मूल मंत्र थे सत्‍य और अहिंसा।

(य) उनकी आत्‍मकथा ‘सत्‍य के प्रयोग’ इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण है।

(र) किसी प्रकार की हिंसा का आश्रय लेकर प्राप्‍त की गई स्‍वाधीनता भी उन्‍हें स्‍वीकार्य न थी।

(ल) अहिंसा से उनका तात्‍पर्य था-मनसा, वाचा, कर्मणा अहिंसा।

(व) सत्‍य के बिना वे एक कदम भी आगे बढ़ने को तैयार न थे।

(6) वास्‍तव में, गॉंधी को महामानव नहीं, देवताओं की कोटि में रखा जाना चाहिए।

(A) ल र य व

(B) र ल व य

(C) व य ल र

(D) य व ल र

 

14. (1) शिव ने उल्‍लासातिरेक में जो उद्दाम नृत्‍य किया था, उसे उनके शिष्‍य तंडु मुनि ने याद कर लिया था।

(य) रस भी अर्थ है, भाव भी अर्थ है, परन्‍तु तांडव में न ‘रस’ है, न ‘भाव’।

(र) ‘तांडव’ अर्थात् तंडू मुनि द्वारा प्रवर्तित ‘रस-भाव-विवर्जित’ नृत्‍य।

(ल) नाचने वाले का कोई उद्देश्‍य नहीं, मतलब नहीं, ‘अर्थ’ नहीं।

(व) उन्‍होंने जिस नृत्‍य का प्रवर्तन किया उसे तांडव कहा जाता है।

(6) केवल जड़ता के दुर्वार आकर्षण को छिन्‍न करके एकमात्र चैतन्‍य की अनुभूति का उल्‍लास।

(A) ल य र व

(B) र ल य व

(C) व य ल र

(D) व र य ल

 

15. (1) मनुष्‍य अपना भाग्‍य-विधाता स्‍वयं है।

(य) उसे चाहिए कि वह संसार के महापुरुषों की जीवनियॉं पढ़े।

(र) अपने बाहुबल का भरोसा कर, आत्‍मविश्‍वास का कवच पहनकर वे संसार-समर में उतर पड़े।

(ल) उनमें से अधिकतर को तो कॉंटों पर ही चलना पड़ा है।

(व) पर, वे भाग्‍य के सहारे बैठे न रहे।

(6) उन्‍होंने यह परवाह न की, कि आगे विस्‍तृत सागर है या विराट हिमालय।

(A) य र ल व

(B) य ल व र

(C) र य ल व

(D) ल र य व

 

16. (1) जिस प्रकार

(य) दहकना है उसी प्रकार

(र) उसके स्‍वभाव का

(ल) मनुष्‍य का धर्म

(व) अग्नि का धर्म

(6) पर्याय होना चाहिए

(A) व य ल र

(B) ल य व र

(C) व य र ल

(D) र ल य व

 

17. (1) आदिलशाही राज्‍य में अनेक लब्‍धप्रतिष्‍ठ कवि हुए हैं।

(य) इस काल का महत्‍व दक्खिनी हिन्‍दी साहित्‍य में सर्वाधिक है।

(र) इब्राहिम आदिलशाह द्वितीय इस काल के एक प्रमुख कवि थे।

(ल) आदिलशाही सुल्‍तानों ने स्‍वयं भी काव्‍य-रचना की थी।

(व) उनकी रचना ‘नवरस’ हिन्‍दी साहित्‍य की अमूल्‍य निधि है।

(6) इसकी भाषा, छंद, अलंकार आदि रीतिकालीन कवियों की याद दिलाते हैं।

(A) व य र ल

(B) ल व य र

(C) य ल र व

(D) र व ल य

 

18. (1) हमारे देश के साहित्‍यशास्त्रियों ने ‘कला के लिए कला’ की समस्‍या को व्‍यापक रूप से देखा था।

(य) उनकी शास्‍त्रीय समीक्षा की पुस्‍तकों में ऐसा ही व्‍यापक विचार देखने को मिलता है।

(र) इसका यह आशय कदापि नहीं है कि कला का आचार से कोई सम्‍बन्‍ध ही नहीं।

(ल) किन्‍तु तथ्‍य इतना ही है कि वस्‍तु रूप में कलाओं का प्रत्‍यक्षीकरण करते हुए आचार आदि के प्रश्‍न वास्‍तव में अंतर्हित हो जाते हैं।

(व) पश्चिम में इसे लेकर बहुत सी व्‍यर्थ की खींचतान हुई है।

(6) आशय यही है कि कला-सम्‍बन्‍धी शास्‍त्र आचार-सम्‍बन्‍धी शास्‍त्र से भिन्‍न है।

(A) व य र ल

(B) र ल व य

(C) व र ल य

(D) य व ल र

 

19. (1) आज हिन्‍दी को प्रत्‍येक क्षेत्र में सम्‍मान प्राप्‍त है

(य) न जाने कितनी समितियॉं और अकादमियॉं सक्रिय हैं।

(र) समस्‍त विश्‍व के विश्‍वविद्यालयों में हिन्‍दी-विभाग खुल चुके हैं।

(ल) हिन्‍दी भाषा और साहित्‍य को समस्‍त विश्‍व में प्रतिष्ठित करने वाले प्रशासनिक माध्‍यम कार्यरत हैं।

(व) उच्‍चस्‍तरीय हिन्‍दी अध्‍यापन की व्‍यवस्‍था के साथ ही शोध संस्‍थान भी गतिशील हैं।

(6) फिर भी हिन्‍दी को वह सर्वोच्‍च स्‍थान प्राप्‍त नहीं है जो उसका सहज प्राप्‍य है।

(A) व र ल य

(B) ल व र य

(C) र य ल व

(D) ल य र व

 

20. (1) वृन्‍दावन लाल वर्मा ने अपने उपन्‍यासों में नारी को ऊँचा स्‍थान प्रदान किया है।

(य) उसमें लाखी की एकनिष्‍ठा, देश‍भक्ति तथा प्रेम की पवित्रता भी अनुकरणीय है।

(र) नारी की नवनीत जैसी कोमलता ओर व्रज जैसी कठोरता, दोनों का मनोवैज्ञानिक विश्‍लेषण किया है।

(ल) गौण पात्रों में कुमुद का आन्‍तरिक प्रेम अतुलनीय है।

(व) ‘मृगनयनी’ में नायिका निन्‍नी का चरित्र अपूर्व साहसिक और सदाचारपूर्ण है।

(6) अन्‍य नारी पात्रों में भी लेखक ने आदर्श का समन्‍वय किया है।

(A) व ल य र

(B) व य ल र

(C) र व ल य

(D) य व ल र

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