हिन्‍दी : छन्‍दों के महत्त्वपूर्ण प्रश्‍न

हिन्‍दी : छन्‍दों के महत्त्वपूर्ण प्रश्‍न

Chand (metres) Questions in Hindi

→ छंद शास्‍त्र (वैदिक छंद) के आदि प्रवर्तक हैं –

(A) ब्रह्मा

(B) विष्‍णु

(C) महेश

(D) बृहस्‍पति

→ छंद शास्‍त्र (लौकिक छंद) के सर्वप्रथम प्रस्‍तोता हैं –

(A) यास्‍क

(B) पिंगल

(C) सैतव

(D) माण्‍डव्‍य

→ निम्‍न में से असुमेलित विकल्‍प है –

रचना – रचनाकार

(A) छन्‍दोविचिति – जनाश्रयी

(B) छन्‍द: सूत्र – पिंगल

(C) सुवृत्त तिलक – क्षेमेन्‍द्र

(D) वृत्त मुक्‍तावली – भट्ट शेखर

→ निम्‍न में से सुमेलित विकल्‍प है –

रचना – रचनाकार

(A) छन्‍द मंजरी – मतिराम

(B) पिंगल प्रकाश – परमानन्‍द

(C) छन्‍द सारावली – जगन्‍नाथदास भानु

(D) पद्य रचना – डॉ. भोलाशंकर व्‍यास

→ नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकास यही काल।

अली कली ही सौं बंध्‍यो, आगे कौन हवाल।।

सही छंद का चयन कीजिए :

(A) दोहा

(B) सोरठा

(C) बरवै

(D) छप्‍पय

→ जो सुमिरत सिधि होई, गन नायक करिवर बदन।

करहु अनुग्रह सोई, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन।।

सही छंद का चयन कीजिए :

(A) दोहा

(B) चौपाई

(C) बरवै

(D) सोरठा

→ मंगल भवन अमंगल हारी।

द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी।।

सही छंद का चयन कीजिए :

(A) सोरठा

(B) सवैया

(C) चौपाई

(D) दोहा

→ कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।

हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।

सही छंद का चयन कीजिए :

(A) कवित्त

(B) बरवै

(C) हरिगीतिका

(D) घनाक्षरी

→ रसखानि कबौं इन आँखिन ते ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं।

सही छंद का चयन कीजिए :

(A) दोहा

(B) सवैया

(C) मालिनी

(D) सोरठा

→ वर्ण, मात्रा, गति, यति आदि के नियन्त्रित रचना को क्‍या कहते हैं?

(A) छन्‍द

(B) दोहा

(C) अलंकार

(D) रस

→ छन्‍द की प्रत्‍येक पंक्ति को क्‍या कहते हैं?

(A) वाक्‍य

(B) चौपाई

(C) चरण

(D) यति

→ प्रवाह लाने के लिए छन्‍द की पंक्ति में ठहरना कहलाता है –

(A) गति

(B) यति

(C) तुक

(D) लय

→ कोई भी छन्‍द किसमें विभक्‍त रहता है?

(A) चरणों में

(B) यति में

(C) उपर्युक्‍त दोनों में

(D) इनमें से कोई नहीं

→ छन्‍द मुख्‍य रूप से कितने प्रकार के होते हैं?

(A) दो

(B) तीन

(C) चार

(D) छ:

→ जिस छन्‍द के पहले तथा तीसरे चरणों में 13-13 और दूसरे तथा चौथे चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं, वह छंद कहलाता है –

(A) रोला

(B) चौपाई

(C) कुण्‍डलिया

(D) दोहा

→ छन्‍द की रचना किसके द्वारा होती है?

(A) गणों के समायोजन से

(B) स्‍वर के समायोजन से

(C) ध्‍वनियों के समायोजन से

(D) इनमें से कोई नहीं

→ 24-24 मात्राओं की दो पंक्तियों वाले छंद को क्‍या कहते हैं?

(A) सोरठा

(B) दोहा

(C) कुण्‍डलिया

(D) रोला

→ छन्‍दशास्‍त्र में ‘दशाक्षर’ किसे कहते हैं?

(A) दस वर्णों के समूह को

(B) ल और ग वर्णों को

(C) आठ वर्णों के समूह को

(D) इनमें से कोई नहीं

→ गणों की संख्‍या होती है –

(A) सात

(B) आठ

(C) नौ

(D) दस

→ छन्‍द-बद्ध पंक्ति में प्रयुक्‍त स्‍वर-व्‍यंजन की समानता को कहते हैं –

(A) चरण

(B) यति

(C) तुक

(D) गण

→ चारों चरणों में समान मात्राओं वाले छन्‍द को क्‍या कहते हैं?

(A) मात्रिक सम छन्‍द

(B) मात्रिक विषम छन्‍द

(C) मात्रिक अर्द्धसम छन्‍द

(D) उपर्युक्‍त सभी

→ छन्‍द का सर्वप्रथम उल्‍लेख कहाँ मिलता है?

(A) ऋग्‍वेद

(B) उपनिषद

(C) सामवेद

(D) यजुर्वेद

→ कुण्‍डली छ: चरण वाले छन्‍द को कहते हैं। इसके प्रत्‍येक चरण में कितनी मात्राएं होती हैं ?

(A) 11

(B) 13

(C) 16

(D) 24

→ मैथिलीशरण गुप्‍त जी के काव्‍य से उन्‍हें कौन से छंद प्रिय होने का प्रमाण मिलता है?

(A) वार्णिक एवं मात्रिक

(B) सम एवं विषम

(C) वार्णिक एवं सम

(D) मात्रिक एवं सम

→ चरणों की मात्रा, यति और गति के आधार पर छन्‍द किस प्रकार के हैं?

(A) सम और विषम

(B) सम, विषम और अर्द्धसम

(C) मुक्‍त और मात्रिक

(D) साधारण और दण्‍डक

→ शिल्‍पगत आधार पर दोहे से उल्‍टा छन्‍द है –

(A) रोला

(B) चौपाई

(C) सोरठा

(D) बरवै

→ ‘वंशस्‍थ’ छन्‍द होता है –

(A) जाति छंद

(B) वृत्त छंद

(C) अर्द्धसम छंद

(D) दण्‍डक छंद

→ ‘वसन्‍ततिलका’ छंद के सन्‍दर्भ में असंगत है –

(A) यह शक्‍वरी जाति का वर्णिक सम छंद होता है।

(B) इसके प्रत्‍येक चरण में 14 वर्ण होते हैं।

(C) इसमें क्रमश: तगण, भगण, जगण, भगण व अंत में दो गुरु वर्ण होते हैं।

(D) इसमें यति प्रत्‍येक चरण में होती है।

→ मालिनी छंद की जाति है –

(A) शक्‍वरी

(B) अतिशक्‍वरी

(C) अत्‍यष्टि

(D) प्रकृति

→ प्रत्‍येक चरण में ‘मगण, भगण, नगण, तगण, तगण, गुरु, गुरु’ किस छंद में मिलते हैं ?

(A) द्रुतविलम्बित

(B) मंदाक्रान्‍ता

(C) मालिनी

(D) वसंततिलका

→ वर्ण संख्‍या के आधार पर छंदों का सही आरोही क्रम है –

(A) वंशस्‍थ, मंदाक्रांता, वसंततिलका, मालिनी

(B) वंशस्‍थ, मालिनी, वसंततिलका, मंदाक्रांता

(C) वंशस्‍थ, वसंततिलका, मालिनी, मंदाक्रांता

(D) मंदाक्रांता, मालिनी, वसंततिलका, वंशस्‍थ

→ ‘गीतिका’ छंद के प्रत्‍येक चरण में मात्राएँ होती हैं –

(A) 22

(B) 24

(C) 26

(D) 28

→ दोहा छंद में कुल मात्राएँ होती हैं –

(A) 11

(B) 13

(C) 24

(D) 48

→ सोरठा छंद में कुल मात्राएँ होती हैं –

(A) 11

(B) 13

(C) 24

(D) 48

→ हरिगीतिका छंद के संदर्भ में गलत तथ्‍य है –

(A) इसके प्रत्‍येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं।

(B) इसमें क्रमश: 16 व 12 मात्राओं पर यति होती है।

(C) इसमें प्रत्‍येक चरण में 5 वीं, 12 वीं, 19 वीं एवं 26 वीं मात्रा गुरु होती है।

(D) प्रत्येक चरण के अंत में क्रमश: लघु, गुरु मात्रा होती है।

→ किस छंद के प्रत्‍येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं –

(A) चौपई

(B) चौपाई

(C) चउपई

(D) उक्‍त सभी

→ ‘कुण्‍डलिया’ छंद के संदर्भ में असंगत तथ्‍य है –

(A) यह विषम मात्रिक छंद होता है

(B) यह दोहा व रोला छंदों को मिलाकर बनाया जाता है

(C) इसमें ‘रोला’ छंद का प्रथम चरण ‘दोहा’ छंद के प्रथम चरण में दोहराया जाता है।

(D) इसे गाथा छंद भी कहा जाता है।

→ ‘रोला’ छंद होता है –

(A) मात्रिक सम

(B) मात्रिक अर्द्ध सम

(C) वर्णिक सम

(D) वर्णिक अर्द्ध सम

→ किस छंद के विषम चरणों में 15 – 15 व सम चरणों में 13 – 13 मात्राएँ होती हैं –

(A) रोला

(B) दोहा

(C) उल्‍लाला

(D) बरवै

→ किस छंद के विषम चरणों में 12 – 12 व सम चरणों में 7 – 7 मात्राएँ होती हैं –

(A) रोला

(B) दोहा

(C) उल्‍लाला

(D) बरवै

→ ‘छप्पय’ छंद किन छंदों के योग से बनता है –

(A) दोहा + रोला

(B) दाहा + उल्‍लाला

(C) रोला + उल्‍लाला

(D) इनमें से कोई नहीं

→ निम्‍न में से ‘कवित्त’ छंद के संदर्भ में असत्‍य कथन है –

(A) इसके प्रत्‍येक चरण में 31 मात्राएँ होती हैं

(B) इसमें क्रमश: 16 व 15 वर्णों पर यति होती है

(C) इसमें लघु – गुरु के नियम लागू नहीं होते हैं।

(D) यह दंडक श्रेणी का छंद है।

→ ‘आठ जगण + एक लघु’ = ……. सवैया

(A) कुंदलता

(B) लवंगलता

(C) चकोर

(D) मालती

→ किस सवैया में आठ भगण होते हैं –

(A) चकोर

(B) दुर्मिल

(C) किरीट

(D) अरसात

→ ‘सुन्‍दरी सवैया’ का लक्षण है –

(A) सात सगण + एक लघु

(B) सात सगण + एक गुरु

(C) आठ सगण + एक लघु

(D) आठ सगण + एक गुरु

→ कौनसा छंद एक प्रकार के शब्‍द से आरंभ एवं समाप्‍त होता है?

(A) छप्‍पय

(B) रोला

(C) कुण्‍डलिया

(D) उल्लाला

→ निम्‍न में से कुल वर्णों की दृष्टि से असुमेलित विकल्‍प है ?

(A) अनुष्‍टुप् – 32

(B) त्रिष्‍टुप् – 44

(C) पंक्ति – 48

(D) प्रकृति – 84

→ निम्‍न में से अर्द्धसम मात्रिक छंद नहीं है –

(A) सोरठा

(B) उल्‍लाला

(C) बरवै

(D) रोला

→ ‘सधेनु आते गृह ग्वाल बाल थे।’

(A) द्रुतविलम्बित

(B) वसन्‍ततिलका

(C) वंशस्‍थ

(D) मालिनी

→ ‘अत्‍यन्‍त प्‍यार सँग थे मिलते सबों से।’

(A) द्रुतविलम्बित

(B) वसन्‍ततिलका

(C) वंशस्‍थ

(D) मन्‍दाक्रान्‍ता

→ ‘हे प्रभो! आनंददाता ज्ञान हमको दीजिए।’

(A) गीतिका

(B) हरिगीतिका

(C) चौपाई

(D) सवैया

→ ‘तेलहु तूलहु पूँछ जरी न जरी जरी लंक जराइ जरी’

(A) मदिरा सवैया

(B) मालती सवैया

(C) सुमुखी सवैया

(D) चकोर सवैया

→ ‘दूलह श्री रघुनाथ बने, दुलही सिय सुंदर मंदिर मांही’

(A) मदिरा

(B) मालती

(C) सुमुखी

(D) चकोर

→ ‘सब सौं ललुआ मिलि के रहिये मन जीवन मूरि सुनो मनमोहन।’

(A) लवंगलता

(B) कुंदलता

(C) अरसात

(D) चकोर

→ ‘किसको पुकारें यहाँ रोकर अरण्‍य बीच, चाहे जो करो शरण्‍य शरण तिहारे हैं।’

(A) मालिनी

(B) वसन्‍तलतिका

(C) कवित्त

(D) हरिगीतिका

→ चुप हुई इतना कह मुग्ध हो,

ब्रज विभूति – विभूषण राधिका।

चरण की रज ले हरिबंध भी,

परम शांति समेत विदा हुए।।

(A) मदिरा सवैया

(B) दुर्मिल सवैया

(C) हरिगीतिका

(D) द्रुतविलम्बित

→ ‘तब तौ छबि पीवत जीवत है अब सोचत लोचन जात जरे।’

(A) मदिरा सवैया

(B) दुर्मिल सवैया

(C) किरीट सवैया

(D) अरसात सवैया

→ ‘और’ शब्‍द का लोप हो, द्वन्‍द्व होवे समास।

संख्‍यावाची प्रथम पद, आता द्विगु के साथ।

आता द्विगु के साथ, कर्म में बने विशेषण।

अव्‍ययी में पहला पद, होत क्रिया – विशेषण।

कह ‘मिश्रा’ कविराय व्रीहि में पद का न ठौर।

तत्‍पुरुष में कारक चिह्न छिपता कहीं और।।

(A) छप्‍पय

(B) कुण्‍डलिया

(C) रोला

(D) कवित्त

***

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *