अलंकार के महत्त्वपूर्ण प्रश्‍न

हिन्‍दी : अलंकार के महत्त्वपूर्ण प्रश्‍न

(Hindi Ornaments Questions)

→ ‘चरर मरर खुल गए अरर रवस्‍फुटों से’ में कौन-सा अलंकार है?

(A) अनुप्रास

(B) श्‍लेष

(C) यमक

(D) उत्‍प्रेक्षा

 

→ नवल सुन्‍दर श्‍याम शरीर में कौन-सा अलंकार है?

(A) उल्‍लेख

(B) उपमा

(C) रूपक

(D) अतिशयोक्ति

 

→ ‘तीन बेर खाती थी वे तीन बेर खाती हैं’ में कौन-सा अलंकार है?

(A) अनुप्रास

(B) श्‍लेष

(C) यमक

(D) अन्‍योक्ति

 

→ ‘तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए में’ कौन-सा अलंकार है?

(A) अनुप्रास

(B) यमक

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) उपमा

 

→चरण-कमल बन्‍दौ हरि राई में कौन-सा अलंकार है?

(A) श्‍लेष

(B) उपमा

(C) रूपक

(D) अतिशयोक्ति

 

निर्देश : निम्‍नलिखित प्रश्‍नों में प्रयुक्‍त अलंकार भेद का चयन कीजिए –

→ ध्‍वनि-मयी कर के गिरी कंदरा।

कलित-कानन केलि निकुंज को।।

(A) छेकानुप्रास

(B) वृत्त्यानुप्रास

(C) लाटानुप्रास

(D) यमक

 

→ रंभा झूमत हौ कहा, कुछक दिन के हेत।

तुमते केते ह्वै गए, और ह्वै हैं यहि खेत।।

(A) वक्रोक्ति

(B) विरोधाभास

(C) लोकोक्ति

(D) अन्‍योक्ति

 

→ बड़े न हूजे गुनन बिनु विरद बड़ाई पाए।

कहत धतूरे सों कनक गहनो गढ़ो न जाए।।

(A) अतिशयोक्ति

(B) प्रतिवस्‍तूपमा

(C) अर्थान्‍तरन्‍यास

(D) विरोधाभास

 

→ बढ़त-बढ़त सम्‍पत्ति सलिल मन-सरोज बढ़ जाए।

घटत-घटत फिर ना घटै करु समूल कुम्हिलाय।।

(A) यमक

(B) विरोधाभास

(C) श्‍लेष

(D) रूपक

 

→ अब अलि रही गुलाब में, अपत कटीली डार।

(A) उपमा

(B) उत्‍प्रेक्षा

(C) अन्‍योक्ति

(D) अतिशयोक्ति

 

→ तू रूप में किरन में, सौंदर्य है सुमन में।

(A) विभावना

(B) रूपक

(C) यथा संख्‍य

(D) उल्‍लेख

 

→ माया महाठगिनि हम जानी।

तिरगुन फांस लिए कर डोलै, बोलै मधुरी बानी।

(A) श्‍लेष

(B) यमक

(C) रूपक

(D) अन्‍योक्ति

 

→ पट-पीत मानहुं तड़ित रुचि, सुचि नौमि जनक सुतावरं।

(A) उपमा

(B) रूपक

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) उदाहरण

 

→ गर्व करउ रघुनन्‍दन जिन मन माँह,

देखउ आपन मूरति सिय के छाँह।

(A) व्‍यतिरेक

(B) रूपक

(C) अतिशयोक्ति

(D) प्रतीक

 

→ मेरा मन अनत कहां सुख पावै,

जैसे उड़ि जहाज को पंछी फिर जहाज पर आवै,

कमल नैन (न) को छांडि महातम, और देव को ध्‍यावै।।

‘कमल नैन’ में अलंकार है –

(A) रूपक

(B) उपमा

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) श्‍लेष

 

→ मेरा मन अनत कहां सुख पावै,

जैसे उड़ि जहाज को पंछी फिर जहाज पर आवै,

‘कमल नैन’ किसको कहा गया है?

(A) विष्‍णु

(B) शंकर

(C) ब्रह्मा

(D) गणेश

 

→ भरतहि होई न राजमदु विधि हरि हर पद पाई।

कबहुँ कि काँजी सीकरनि द्दीर सिंधु बिनसाई।।

(A) उदाहरण

(B) दृष्‍टान्‍त

(C) निदर्शना

(D) व्‍यतिरेक

 

→ माला फेरत युग गया, फिरा न मन का फेर।

कर का मनका छाड़ि दे, मन का मनका फेर।।

(A) अनुप्रास

(B) श्‍लेष

(C) यमक

(D) रूपक

 

→ सोहत ओढ़े पीत पट, स्‍याम सलोने गात।

मनहुँ नील मनि सैल पर आतप परयो प्रभात।।

(A) यमक

(B) उत्‍प्रेक्षा

(C) रूपक

(D) श्‍लेष

 

→ मुख बाल-रवि-सम लाल होकर ज्‍वाल-सा बोधित हुआ।

(A) उपमा

(B) उत्‍प्रेक्षा

(C) उपमेयोपमा

(D) रूपक

 

→ मेखलाकार पर्वत अपार

अपने सहस्‍त्र दृग सुमन फाड़,

अवलोक रहा था बार-बार

नीचे जल में निज महाकार।

(A) उपमा

(B) रूपक

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) यमक

 

→ चिरंजीवौ जोरी जुरै, क्‍यों न सनेह गंभीर।

को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।।

(A) यमक

(B) रूपक

(C) श्‍लेष

(D) उत्‍प्रेक्षा

 

→ नहिं पराग नहिं मधुर, मधु, नहिं विकास येहि काल।

अली कली ही सों बध्‍यो, आगे कौन हवाल।।

(A) रूपक

(B) विशेषोक्ति

(C) अन्‍योक्ति

(D) अतिशयोक्ति

 

→ सब प्राणियों के मत्तमनोमयूर अहा नचा रहा।

(A) उपमा

(B) रूपक

(C) श्‍लेष

(D) उत्‍प्रेक्षा

 

→ वह इष्‍ट देव के मंदिर की पूजा-सी,

वह दीप शिखा-सी शांत भाव में लीन

वह टूटे तरू की छूटी लता-सी दीन,

दलित भारत की विधवा है।

(A) उपमा

(B) रूपक

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) यमक

 

→ राम-नाम अवलंबु बिनु, परमारथ की आस,

बरसत बारिद बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास।

(A) रूपक

(B) उत्‍प्रेक्षा

(C) उपमा

(D) अतिशयोक्ति

 

→ वही मनुष्‍य है जो मनुष्‍य के लिए मरे।

(A) छेकानुप्रास

(B) वृत्‍यनुप्रास

(C) लाटानुप्रास

(D) यमक

 

→ तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।

(A) अनुप्रास

(B) यमक

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) उपमा

 

→ मखमल के झूले पड़े हाथी-सा टीला।

(A) रूपक

(B) उपमा

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) उल्‍लेख

 

→ अति मलीन, वृषभानु कुमारी।

अधमुख रहित, उरध नहीं चितवत्,

ज्‍यों गथ हारे थकित जुआरी।

छूटे चिकुर बदन कुम्हिलानो, ज्‍यों

नलिनी हिसकर की मारी।।

(A) अनुप्रास

(B) उत्‍प्रेक्षा

(C) रूपक

(D) उपमा

 

 

→ पीपर पात सरिस मन डोला।

(A) उपमा

(B) उत्‍प्रेक्षा

(C) रूपक

(D) उल्‍लेख

 

→ तीन बेर खाती थी वे तीन बेर खाती हैं।

(A) अनुप्रास

(B) श्‍लेष

(C) यमक

(D) अन्‍योक्ति

 

→ बीती विभारी जाग री।

अम्‍बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी।

(A) उपमा

(B) उत्‍प्रेक्षा

(C) रूपक

(D) उपमेयोपमा

 

→ चरर मरर खुल गए अरर रवस्‍फुटों से।

(A) अनुप्रास

(B) श्‍लेष

(C) यमक

(D) उत्‍प्रेक्षा

 

→ बाँधा था विधु को किसने, इन काली जंजीरों से।

मणिवाले फणियों का मुख, क्‍यों भरा हुआ हीरों से।।

(A) रूपक

(B) अतिशयोक्ति

(C) श्‍लेष

(D) विरोधाभास

 

→ कनक-कनक ते सौगुनी मादकता अधि काय।

या खाए बौरात नर, वा पाए बौराय।।

(A) उपमा

(B) यमक

(C) अनुप्रास

(D) श्‍लेष

 

→ ज्‍यों-ज्‍यों बूड़े स्‍याम रंग, त्‍यौं-त्‍यौं उज्‍ज्‍वल होय।

(A) उत्‍प्रेक्षा

(B) विरोधाभास

(C) उपमा

(D) यमक

 

→ चरण-कमल बन्‍दौ हरि राई।

(A) श्‍लेष

(B) उपमा

(C) रूपक

(D) अतिशयोक्ति

 

→ तापस बाला-सी गंगा कूल।

(A) श्‍लेष

(B) उत्‍प्रेक्षा

(C) रूपक

(D) उपमा

 

→ नवल सुन्‍दर श्‍याम शरीर।

(A) उल्‍लेख

(B) उपमा

(C) रूपक

(D) अतिशयोक्ति

 

→ ऊंचे घोर मन्‍दर के अंदर रहनवारी,

ऊंचे घोर मन्‍दर के अंदर रहाती है।

(A) यमक

(B) उपमा

(C) श्‍लेष

(D) रूपक

 

→ यह देखिए, अरविंद से शिशुवृंद कैसे सो रहे।

(A) उत्‍प्रेक्षा

(B) उपमा

(C) रूपक

(D) यमक

 

→ हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग।

लंका सिगरी जल गई, गए निसाचर भाग।।

(A) श्‍लेष

(B) रूपक

(C) अतिशयोक्ति

(D) विरोधाभास

 

→ मो सम कौन कुटिल खल कामी।

(A) उपमा

(B) वक्रोक्ति

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) इनमें से कोई नहीं

 

→ हिमन जो गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।

बारे उजियारे लगै, बढ़ै अंधेरो होय।।

(A) उपमा

(B) रूपक

(C) यमक

(D) श्‍लेष

 

→ ‘उसी तपस्‍वी से लंबे थे, देवदार दो चार खड़े।’ इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

(A) अनुप्रास

(B) प्रतीप

(C) रूपक

(D) यमक

 

→ जहाँ उपमेय में अनेक उपमानों की शंका होती है वहाँ कौन-सा अलंकार होता है?

(A) यमक

(B) श्‍लेष

(C) भ्रांतिमान

(D) संदेह

 

→ जहाँ बिना कारण के कार्य का होना पाया जाए वहाँ कौन-सा अलंकार होता है?

(A) विरोधाभास

(B) विशेषोक्ति

(C) विभावना

(D) भ्रांतिमान

 

→ ‘पट-पीत मानहुं तड़ित रुचि, सुचि नौमि जनक सुतावरं’ में कौन-सा अलंकार है?

(A) उपमा

(B) रूपक

(C) उत्‍प्रेक्षा

(D) उदाहरण

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